Description
जात्याध घृत एक पारंपरिक आयुर्वेदिक घृत है, जो व्रण (घाव) और जलन से होने वाले दर्द में अत्यंत लाभकारी है। यह शरीर के घावों को शुद्ध और जल्दी भरने में मदद करता है।
संदर्भ: भैषज्यरत्नावली
जात्याध घृत में उपयोग की गयी सामग्री:
गौ घृत, चमेली के पत्ते, नीम के पत्ते, पटोल पत्र, कुटकी, दारू हल्दी, हल्दी, सारिवा मूल, मंजीठ, उशीर, देशी मौम, शुद्ध तूतिया (नीला थोथा), मुलैठी, करंजवीज़
जात्याध घृत के फायदे:
- भगन्दर, हरस-बवासीर, फिशर, गेंगरीन, पुराने घाव और शुगर वाले घावों में लाभकारी
- जलन और दर्द को शांत करता है
- गर्भस्थानो के दूषित व्रण, नाडी व्रण और वेदनायुक्त व्रण में श्रेष्ठ शोधन एवं रोपण में सहायक
- वर्तमान समय में एंटीबायोटिक्स के उपयोग के बावजूद व्रणशोथ जैसी स्थितियों में अत्यंत लाभकारी
जात्याध घृत के उपयोग की विधि:
- हरस, भगन्दर जैसी समस्या में १०–१५ ml घृत इंजेक्शन में भरकर दो इंच अंदर छोड़ें
- जहाँ घाव है, वहाँ घृत लगाना है
नोंध: यह घृत खाने के लिए वर्जित है।
समाप्ति अवधि: १ वर्ष





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