Description
गुग्गुलु तिक्तक घृत एक पारंपरिक आयुर्वेदिक घृत है, जो वात और रक्त विकारों को शांत करने तथा शरीर के विभिन्न रोगों में सहायक है। यह शरीर को स्वस्थ और संतुलित बनाता है।
संदर्भ: सहस्त्र योग
गुग्गुलु तिक्तक घृत में उपयोग की गयी सामग्री:
निम्ब, गुडूची, पटोल, कण्टकारी, पाठा, विडंग, देवदारु, गजपिप्पली, यवक्षार, स्वजिकाक्षार, शुंठी, हरिद्रा, शतपुष्पा, चवक, कुष्ठ, तेजोवती, मरिच, इन्द्रयव, दीप्यक(अजमोदा), चित्रक, कटुरोहिणी, भल्लातक, वचा, पिप्पलीमूल, मंजिष्ठा, अतिविषा, विषया, यवानी, शुद्ध गुग्गुलु, गौ घृत।
गुग्गुलु तिक्तक घृत के फायदे:
- वातव्याधि, सन्धिगत, अस्थिगत और मज्जागत कुष्ठ में सहायक
- नाडीव्रण, अर्बुद, भगन्दर, गण्डमाला, गुल्म, अर्श, प्रमेह, राजयक्ष्मा में उपयोगी
- अरुचि, श्वास, पीनस, कास, शोध, हृदयरोग, पाण्डुरोग, मद, विद्रधि तथा वातरक्त को शांत करता है
गुग्गुलु तिक्तक घृत के उपयोग की विधि:
- सुबह और शाम भोजन से पहले गर्म पानी के साथ सेवन करें
नोंध: वैद्य की सलाह अनुसार उपयोग करें।
समाप्ति अवधि: १ वर्ष





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