Description
दाड़िमाद्य घृत एक पारंपरिक आयुर्वेदिक घृत है, जिसका उपयोग प्राचीन काल से स्नेहकर्म और विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। यह शरीर को संतुलित कर पाचन, मूत्र और प्रजनन स्वास्थ्य में सहायक होता है।
संदर्भ: भैषज्य रत्नावली
दाड़िमाद्य घृत में उपयोग की गयी सामग्री:
अनारदाना, बायविडिंग, हल्दी, चव्य, स्याह जीरा, त्रिफला, सौंठ, छोटा पीपल, गोखरू, अजवाइन, धनिया, तिंतडीक, पीपलीमूल, हाऊबेर, सेंधा नमक।
दाड़िमाद्य घृत के फायदे:
- प्रमेह, मूत्राघात, अश्मरी और मूत्रकृच्छ में लाभकारी
- हृदय रोग, एनीमिया और बवासीर में सहायक
- पाचन तंत्र को मजबूत कर गैस और वायु विकार में लाभ देता है
- खांसी और अस्थमा में उपयोगी
- महिलाओं में प्रजनन स्वास्थ्य और बांझपन में सहायक
- गर्भवती महिलाओं में सामान्य प्रसव में सहायक
दाड़िमाद्य घृत के उपयोग की विधि:
- सुबह और शाम 10–20 ग्राम सेवन करें
नोंध: वैद्य की सलाह अनुसार सेवन करें।
समाप्ति अवधि: १ वर्ष





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