Description
संदर्भ: रसरत्नाकर
सोम घृत को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है, जिसे गायत्री मंत्र द्वारा सिद्ध किया जाता है। यह आयुर्वेदिक घृत विशेष रूप से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना गया है।
सोम घृत में उपयोग की गई औषधि:
सफेद सरसों, वच, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, पुनर्नवा, क्षीरकाकोली, हरड़, बहेड़ा, आंवला, कूठ, कुटकी, अनंतमूल, करियावासाऊ, मुलेठी, चोरक, मालती के फूल, अडूसे के फूल, मंजीठ, देवदारू, सोंठ, पीपल, गजपीपल, भांगरा, हल्दी, काला निसोत, सुवर्चला, दशमूल, शतावर, चिरचिटा, अश्वगंधा।
सोम घृत के फायदे:
- इसे २ से ६ महीने की गर्भवती स्त्री सेवन करें।
- इसके सेवन करने से स्त्री सर्वज्ञ और सर्वरोग रहित पुत्र उत्पन्न करती है।
- जो स्त्री योनिदुष्टा है, जिन मनुष्योका वीर्य दूषित है उन सबके विकारोको यह सोमघृत निश्चय दूर करता पाया गया है। जड़ता, गूंगापन आदि रोग इस घृत के पीनेसे नि:संदेह दूर होते देखे गए है।
- इसको सात रोजतक सेवन करनेसे मनुष्य उत्तम स्वरवाले हो सकते है।
- इस घृतको एक महीने तक सेवन करने से बहरे मनुष्य सुनने लगते हैं।
- ऐसी मान्यता है जिस घरमे यह सोमघृत रहता है, उस घर में कदापि अग्नि नहीं लगती, न बिजली गिरे और न बालक मरते है।
उपयोग की विधि:
- सुबह और शाम 1 चम्मच गाय के दूध के साथ सेवन करें
- या वैद्य की सलाह अनुसार उपयोग करें
नोट: वैद्य की सलाह अनुसार सेवन करना उत्तम है।
समाप्ति अवधि: १ वर्ष






Reviews
There are no reviews yet.