Description
महातिक्त घृत विभिन्न प्रकार के कुष्ठ, रक्तपित और वातरक्त विकारों में सहायक प्रभावशाली घृत है।
संदर्भ ग्रंथ: रसरत्नाकर
महातिक्त घृत में उपयोग की गयी सामग्री:
सत्वन छाल, अतीस, अमलतास गूदा, कुटकी, पद, नगरमोथा, खस, हरड़, बहेड़ा, आंवला, नीम छाल, पित्तपापड़ा, धमासा, रक्त चंदन, पीपली, गजपीपली, पद्मक, हल्दी, दारुहल्दी, वचा, इंद्रायण, शतावरी, गौरी वासा, कारी वासा, इंद्रजौ, अडूसा, मूर्वा, गिलोय, चिरायता, मुलेठी, त्रायमाणा
महातिक्त घृत के फायदे:
- कुष्ठ, रक्तपित, प्रबल बवासीर और विसर्प में लाभकारी
- अम्लपित, वातरक्त, पांडुरोग, पामारोग और उन्माद में सहायक
- कामला, ज्वर, कण्डु, ह्रदयरोग, गुल्म, पीड़का, प्रदर और गण्डमालादी रोगों को दूर करता है
महातिक्त घृत के उपयोग की विधि:
- सुबह और शाम 5–10 ग्राम गरम दूध या पानी के साथ सेवन करें
नोंध: वैद्य की सलाह अनुसार उपयोग करें।
समाप्ति अवधि: १ वर्ष





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