Description
महापंचगव्य घृत ज्वर, मानसिक रोग और पाचन विकारों में सहायक प्रभावशाली घृत है।
संदर्भ ग्रंथ: अष्टाङ्गहृदयम्
महापंचगव्य घृत में उपयोग की गयी सामग्री:
गौ घृत, दूध, दही, गोबर, गौ मूत्र, हरिद्रा, दारू हरिद्रा, कुटज त्वक, सप्तपर्णी, अपामार्ग, कुष्ठ, कटुक रोहिणी, आरग्वध, पुष्कर मूल, धन्याशा, दशमूल, उदुम्बर, त्रिफला यवकूट, भारंगी, पाठा, तुगपर्णी, तिवृत, कृष्णकेशी, त्रिकटु, रोहिष, मयूर वेणी, कालमेघ, गजपिप्पली, सारिवा, मल्लिका, चित्रक, नकुली
महापंचगव्य घृत के फायदे:
- ज्वर, मानसिक रोग और अपस्मार में लाभकारी
- सूजन (शोथ) को कम करता है तथा भगंदर और हरस में उपयोगी
- कामला (पीलिया) और पाण्डुरोग में सहायक
- उदररोग, गुल्म और खाँसी में लाभकारी
- अग्नि को प्रदीप्त कर पाचन शक्ति को सुधारता है
महापंचगव्य घृत के उपयोग की विधि:
- सुबह खाली पेट और रात को सोते समय 1–2 चम्मच देशी गाय के गरम दूध के साथ लें
नोंध: अपने वैद्य की सलाह अनुसार प्रयोग करें।
समाप्ति अवधि: १ साल





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