Description
पिप्पलाद्य घृत जीर्णज्वर, क्षय और श्वास रोगों में सहायक प्रभावशाली घृत है।
संदर्भ: भैषज्यरत्नावली
पिप्पलाद्य घृत में उपयोग की गयी सामग्री:
गौघृत, पिप्पली, चंदन, नागरमोथ, खश, कुटकी, इन्द्रजौ, भूमि आँवला, सारिवा, अतीस, पृश्निपर्णी, मुनक्का, आँवला, बेलगिरी, त्रायमाण, छोटी कटेरी
पिप्पलाद्य घृत के फायदे:
- जीर्णज्वर और क्षय में सहायक
- श्वास, हिक्का और शिरःशूल को दूर करता है
- अरुचि, अंगों में ताप और विषमाग्नि में लाभकारी
- उत्तम गुण वाला और फलदायक आयुर्वेदिक घृत
पिप्पलाद्य घृत के उपयोग की विधि:
- सुबह खाली पेट और रात को भोजन के बाद 10–20 ग्राम गरम दूध या पानी के साथ लें
नोंध: वैद्य की सलाह अनुसार उपयोग करें।
समाप्ति अवधि: १ वर्ष





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