Description
संदर्भ ग्रंथ : शार्ङ्गधरसंहिता – मध्यमखंड
अमृता घृत आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधीय घृत है, जो प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने, पित्त दोष को संतुलित करने तथा वात-रक्त एवं त्वचा संबंधी रोगों में लाभकारी माना जाता है।
अमृता घृत में उपयोग की गई औषधि:
घृत, गिलोय (अमृता), गाय का दूध।
अमृता घृत के फायदे:
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
- त्वचा रोगों जैसे कुष्ठ, एक्जिमा, सोरायसिस में लाभकारी
- वात-रक्त (गठिया व रक्त विकार) में प्रभावी
- पाचन सुधारने में सहायक (ग्रहणी, अम्लपित्त)
- लीवर को मजबूत बनाने में सहायक
- मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है (तनाव व सिरदर्द में लाभकारी)
उपयोग की विधि:
- प्रतिदिन सुबह या दिन में 2 बार 5–10 ग्राम मात्रा में गुनगुने पानी के साथ सेवन करें
- त्वचा विकारों में बाहरी उपयोग (लेप) के रूप में भी किया जा सकता है
नोट: वैद्य की सलाह अनुसार सेवन करना उत्तम है।
समाप्ति अवधि: १ वर्ष





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